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सुनाई सफलता की कहानी

इंदौर।  फ्रेंड्स ऑफ एमपी कॉन्क्लेव के मंच से मंदसौर के छोटे से गांव सोनगिरी में पले-बढ़े वाजिद खान अनोखे कलाकार हैं। वे कील से पोर्ट्रेट बनाते हैं। उन्होंने बताया कि इंदौर ने मुझे पहचान दिलाई। कील से बनाई पहली पेटिंग ही 30 लाख में बिकी। बाद में अरब के राजपरिवार से लेकर ब्रिटेन और तमाम देशों में काम किया। पत्थर से लेकर हर वस्तु से पेटिंग बना सकता हूं। फीफा वर्ल्ड कप के लिए भी आर्ट वर्क का काम मिला है। दुबई में रह रहे 34 साल के वाजिद ने सीएम से कहा कि पैसा खूब कमा लिया। अब मैं बच्चों के लिए मुफ्त काम करना चाहता हूं। मामा मुझे भी अपना भांजा बना लो। सीएम ने वाजिद को भारत भवन में स्थायी जगह देने का वादा किया। टोरंटो से आए उद्यमी अर्जुन जसूजा ने 1974 में कंपनी की नींव रखी। वे बोले- मैंने असफलता से बहुत कुछ सीखा। आज भी अपने प्रदेश और शहर कटनी को नहीं भूला। अब मप्र के लिए कुछ करना चाहता हूं। सीएम जो आदेश करेंगे, वह करूंगा। हांगकांग में जन्मे सिद्धार्थ आईलदासानी ने कहा कि मैं अपनी जड़ों की ओर लौटा हूं। उद्योग के जरिए कुछ करने का मौका है। पीथमपुर में दवा का पहला प्लांट डाल लिया है। मार्च तक उत्पादन शुरू होगा। इसके बाद हम दूसरा प्लांट भी शुरू करेंगे।

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